CGIT Update

मित्रों नमस्कार

जैसा कि आप सभी जानते हैं सी जी आई टी, संबंधित निर्णय लगभग निर्णायक स्थिति में है, कल दिनांक 19 मई 2017 को क्षेत्रीय स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय कार्यालय द्वारा भर्ती संबंधी प्रक्रिया तथा अन्य बिंदुओं को लेकर विस्तार से निर्देशित किया जाना है, मित्रों CG आई टी संबंधी इस प्रक्रिया नें विगत 20- 22 वर्षों में अनगिनत उतार चढ़ाव देखे हैं, इससे पूर्व वर्ष 2012 में चतुर्थश्रेणी में कुछ साथियों को recruitment प्रक्रिया से गुजरना भी इसका एक अंग था. आपको मैं स्मरण कराता चलूं कि विगत 22 फरवरी 2017 को प्रबंधन की पुनरीक्षण याचिका अदालत द्वारा निरस्त कर दी गई. जोकि उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रबंधन को 8 सप्ताह का समय दिए जाने के बाद निगम द्वारा अदालत में दाखिल की गई थी,और उस समय उच्चतम न्यायालय ने 9 अगस्त 2016 को दिए गए निर्णय को लागू किए जाने के आदेश पारित किए पर तमाम कोशिशों के बावजूद प्रबंधन ने कोई सकारात्मक रुख नहीं अपनाया विवश होकर ऑल इंडिया लाइफ इंश्योरेंस इंप्लाइज एसोसिएशन ने कंटेंम्प्ट पेटिशन संख्या 637/2015, 9 मई 2017 को फाइल की, जिसकी एक प्रति निगम के अधिवक्ता श्री मुकुल रोहतगी अटॉर्नी जनरल को हस्तगत कर दी
मैं पूरी दृढ़ता से यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि केवल और केवल हमारे संगठन की इसी क्रियाशीलता के परिणाम स्वरुप आज LIC ने निगम में समायोजन (absorption) की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है absorption का अर्थ है कि बिना किसी परीक्षा या साक्षात्कार इत्यादि के सीधे समायोजन किया जाना।
साथियों उच्चतम न्यायालय की भर्ती प्रक्रिया संबंधी कुछ निर्णय और भी हैं
प्रथम चरण में जैसी की संभावना है वर्ष 1991 तक जिन जिन साथियों ने तृतीय श्रेणी में पचासी दिन तथा चतुर्थ श्रेणी में 75 दिन तक कार्य किया उनको यह मानते हुए उन्होंने अपना सेवाकाल पूर्ण किया है( भले ही उनकी सेवाएं 85 या 75 दिन के उपरांत समाप्त कर दी गई हों) सेवा संबंधी समस्त लाभ जिनमें सेवानिवृत्ति, लाभ मृत्यु लाभ, पेंशन लाभ पारिवारिक पेंशन लाभ या सामान्य रूप से सेवानिवृत्त होने के उपरांत मिलने वाले सामान्य लाभ पूरी तरह मिलने चाहिए तात्पर्य यह है कि यदि व्यक्ति जीवित है तो उसे यह मानते हुए कि उसने अपना सेवाकाल पूर्ण किया है और यदि अजीवित है तो उसके परिवार को पारिवारिक पेंशन लाभ तक मिलने की व्यवस्था न्यायालय द्वारा दी गई है।
प्रबंधन ने अदालत में जब इस निर्णय का विरोध किया तो अदालत ने , प्रबंधन को थोड़ी छूट देते हुए यह व्यवस्था दी की इस परिधि में आने वाले कर्मचारियों को यह मानते हुए कि उन्होंने अपना सेवाकाल पूरा किया है तथा सेवाकाल पूर्ण मानते हुए जो भी आर्थिक हित लाभ देय होंगे, उसका आधा या तो कर्मचारी या कर्मचारी के जीवित ना रहने की स्थिति में उसके परिवार को देना होगा ,बाकी शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी, इतना ही नहीं अदालत ने कर्मचारी के ना रहने की स्थिति में पारिवारिक पेंशन तथा अनुकंपा मूलक आधार पर परिवार के किसी व्यक्ति को उसी प्रकार नियुक्ति देने का प्रावधान किया जैसा की सामान्यता कर्मचारी के सेवाकाल में दिया जाता है।
साथियों यह स्पष्ट कर देना भी आवश्यक है की अदालत से लड़ाई की यात्रा वर्ष 1985 में ऑल इंडिया लाइफ इंश्योरेंस के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री श्री एस एस जैन के नेतृत्व में प्रारंभ हुई कालांतर में कई संगठन बहती गंगा में हाथ धोने की प्रक्रिया निभाते हुए कुछ दिनों तक साथ तो चले पर बाद में यह लड़ाई अकेले श्री जैन साहब ने व्यक्तिगत रूप से ऑल इंडिया Life Insurance इंप्लाइज एसोसिएशन AILIEA के नेतृत्व में लड़ी और उस पर आज प्राप्त होने वाली सफलता अर्जित की, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि यह लड़ाई केवल और केवल श्री एसएस जैन के व्यक्तिगत प्रयास का प्रतिफल है।
इस निर्णय से प्रभावित तमाम साथियों से मेरा करबद्ध निवेदन है कि वह किसी अन्य व्यक्ति या संगठन के बहकावे में न आएं, क्योंकि पिछला उदाहरण हमें याद है जब तमाम साथियों को नियुक्ति प्रक्रिया से दूर रखने के सारे प्रयास किए गए और परिणाम स्वरुप लखनऊ मंडल में तमाम शाखाओं तथा फैजाबाद मंडल की लगभग सभी शाखाओं से साथियों को नियुक्ति प्रक्रिया से वंचित होना पड़ा अतः इस प्रक्रिया में संभावित सभी साथियों से अनुरोध है कि ऑल इंडिया लाइफ इंश्योरेंस इंप्लाइज एसोसिएशन के संघर्ष को ध्यान में रखते हुए केवल और केवल लाइफ पर ही भरोसा करें क्योंकि लाइफ के पूर्व महामंत्री श्री एस एस जैन ने यह निर्णय किया है के न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा आप लोगों से एक और निवेदन है इस संबंध इस संबंध में किसी भी जानकारी के लिए, 9415253141 पर दिनेश सिंह जी से तथा 9307021711″9415085419 पर सोमेंद्र श्रीवास्तव जी से संपर्क कर सकते हैं

संघर्ष की पूरी कहानी वर्ष 1985 से.

1-दिनांक, 4/3/1991,CGIT,CENTRAL GOVERNMENT INDUSTRIAL TRIBUNAL AWARD, कर्मचारियों के पक्ष में,
2- Justice श्रीवास्तव ने जामदार और टुलपुले अवार्ड (NIT, NATIONAL INDUSTRIAL TRIBUNAL AWARD) को ABSORB किये जाने का निर्णय दिया
3- वर्ष 2009 से केवल LIFE, INTUC AND CL-IV, के साथी ही कानूनी लड़ाई लड़ते रहे शेष मैदान छोड कर भाग लिए
4- Case filed under Civil appeal no. 6951/53 in 2009 by life and न्यायालय का निर्णय 18/03/2015 को आया
5-आल इंडिया लाइफ इंश्योरेंस इम्पलाईज एसोसिएशन के अधिवक्ता श्री बी. के. पाल ने 15/03/2017 को legal notice तथा 9/05/2017 को contempt notice serve की

संलग्न अभिलेखों से स्वयं सिद्ध है

क्रांतिकारी अभिवादन सहित आपके सहयोग का सदैव आकांक्षी व ऋणी

अजहर जमाल सिद्दीकी,

महामंत्री, लाईफ इंश्योरेंस इम्पलाईज एसोसिएशन, लखनऊ इकाई

Discussions held with Management at Central Office

Cir.05/2017 23.01.2017
To: All Zonal/Divisional Units:
Dear Friends,
Sub: Discussions held with Management at Central Office
All India Life represented by Shri Manohar Viegas, General Secretary, Shri Ganesh Nayak, Joint
Secretary, Shri B.T. Khandekar, President, Mumbai D.O. Unit-I and Shri Arun Mane, Mumbai Unit met Shri
Sharad Shrivastva, E.D.(Personnel), Ms. T.S. Hindoyar, Chief (Personnel) and Shri M.C. Chaturvedi,
Secretary (ER) on 18
th
January 2017 at CO/Mumbai. The following issues were discussed.
1) All India Life conveys the bitter feelings of the LIC Employees at Ground Level:
At the beginning of the discussions itself, All India Life Delegation didn’t mince words in conveying the
feelings of the employees at the ground level.
a) Expresses strong resentment and anger over non-fulfillment of assurances
pertaining to last wage settlement.
b) No Information Sharing Session with the Employees’ Representatives since
the last wage settlement
c) Lowered the morale and created a feeling of mistrust by efforts to push TMP through various
methods.
d) Diamond Jubilee Year passed out without any mementos to the employees.
2) Management’s Admission and Defensive to the feelings of the Employees:
i) On Agreed Pending Benefits –
At the outset, Shri Sharad Srivastav, E.D.(P) while reacting to the All India Life Delegation concern on
behalf of the employees, admitted that the issue of 5 Days Week as per GIPSA, Accumulation up to 270
days and Paternity Leave which were agreed in principle during the last wage settlement could not be
notified till date due to inordinate delay by the Ministry in taking a decision to that effect.
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